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Sambhaji Maharaj
- Poem written by Yogendra Puranik ‘Yogi’, PhD, Tokyo, Japan in June 2026
मराठी
पुरंदरच्या भूमीवर उगवला तेजस्वी राजकुमार,
शिवरायांच्या वंशाचा बनला तो गौरवशाली आधार।
जिजाऊंच्या छायेखाली घेतले संस्कार महान,
धैर्य, नीती, विद्वत्ता यांचे मिळाले अमूल्य दान।
बालवयातच अभ्यासाचा धरला दृढ ध्यास,
ज्ञान आणि पराक्रमाचा जपला अखंड श्वास।
संस्कृत, मराठी, फारसी भाषांवर होते प्रभुत्व,
नेतृत्व आणि पराक्रमामुळे वाढले त्यांचे महत्त्व।
रणांगणी गर्जत होता सिंहासम वीर,
शत्रूंच्या हृदयात निर्माण करी गंभीर धीर।
औरंगजेबाच्या सामर्थ्याशी दिला कठोर मुकाबला,
स्वराज्याच्या रक्षणासाठी आयुष्यभर झुंजला।
संकटांचे वादळ आले, झाले अनेक प्रहार,
तरी न सोडला स्वाभिमानाचा तेजस्वी आधार।
धर्म आणि स्वातंत्र्यासाठी सोसल्या असंख्य यातना,
त्याग, निष्ठेने मिळविल्या अमर स्मृतींच्या वेदना।
कैद आणि छळासमोर न झुकली त्यांची मान,
मृत्यूवरही मात करून वाढविला राष्ट्राचा अभिमान।
संभाजीराजे शिकवितात सत्याचा धरावा ध्यास,
कर्तव्य आणि राष्ट्रहितासाठी अर्पावा प्रत्येक श्वास।
ज्ञान, शौर्य, स्वाभिमान यांचा जपावा मान,
तुमच्या चरणी योगी अर्पितो जीवन आणि प्राण।
हिंदी
पुरंदर की धरती पर उदित हुआ एक तेजस्वी कुमार,
शिवराय के वंश का बना वह गौरवशाली आधार।
माता जीजाबाई की छाया में पाए महान संस्कार,
साहस, नीति और विद्वत्ता का मिला अमूल्य उपहार।
बाल्यकाल से ही अध्ययन का लिया दृढ़ संकल्प,
ज्ञान और पराक्रम का किया जीवनभर अनुशीलन।
संस्कृत, मराठी और फ़ारसी भाषाओं पर था अधिकार,
नेतृत्व और वीरता से बढ़ा उनका सम्मान अपार।
रणभूमि में गर्जता था वह सिंह समान वीर,
शत्रुओं के हृदय में भर देता था गंभीर धीर।
औरंगज़ेब की शक्ति को दी उसने कड़ी चुनौती,
स्वराज्य की रक्षा हेतु जीवनभर की साधना होती।
संकटों के तूफ़ान आए, हुए अनेक प्रहार,
फिर भी न छोड़ा स्वाभिमान का उज्ज्वल आधार।
धर्म और स्वतंत्रता हेतु सहीं असंख्य यातनाएँ,
त्याग और निष्ठा से अर्जित की अमर गौरवगाथाएँ।
कैद और अत्याचार के आगे न झुका उनका मान,
मृत्यु को भी जीतकर बढ़ाया राष्ट्र का सम्मान।
संभाजी राजे सिखाते हैं सत्य का रखना ध्यास,
कर्तव्य और राष्ट्रहित हेतु अर्पित करना हर श्वास।
ज्ञान, शौर्य और स्वाभिमान का रखना मान,
आपके चरणों में योगी अर्पित करता जीवन और प्राण।
On land of Purandar was born a radiant prince,
He became the glorious pillar of Shivaji’s lineage.
English
Under the care of Jijabai, he received noble values,
He was blessed with courage, wisdom, and virtue.
From childhood, he was devoted to learning,
He breathed knowledge and valor through his life.
He mastered Sanskrit, Marathi, and Persian,
His leadership and bravery earned him respect.
On the battlefield, like a lion he roared,
His enemies felt both awed and feared.
He stood firmly against the might of Aurangzeb,
Fought throughout his life to protect nation’s neb.
Storms of hardship, and many blows were struck,
Yet he never abandoned his radiant self-respect.
For faith and freedom, he endured sufferings,
Through sacrifice and loyalty, he earned glory.
Imprisonment and torture wouldn’t bow his head,
Even in death, the pride of nation strengthened.
Sambhaji teaches us to pursue the path of truth,
Dedicate every breath to duty and nation's good.
Let's cherish knowledge, courage, & self-respect,
At your feet, Yogi offers life and soul in respect.
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