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Chhatrapati Shivaji Maharaj
A poem written by Yogendra Puranik 'Yogi', PhD in June 2026
मराठी
शिवनेरीच्या किल्ल्यावर उगवला स्वातंत्र्याचा सूर्य,
जिजाऊंच्या संस्कारांनी घडला पराक्रमाचा धुर्य।
रामायणाच्या कथा, महाभारताचे तेज,
बालशिवबाच्या अंतरी पेटला स्वराज्याचा मेज।
दादोजींच्या शिस्तीतून घडली कर्तृत्वाची वाट,
अन्यायाविरुद्ध उभा राहिला निर्धाराने ठाम ठाट।
मावळ्यांच्या संगतीने बांधली विश्वासाची वीण,
रयतेच्या सुखासाठी वाहिली आयुष्याची शिण।
तोरणा जिंकुनी उंचावला मराठी अभिमान,
सह्याद्रीच्या दऱ्याखोऱ्यांत घुमला स्वराज्याचा गान।
अफझलखानासमोर दाखविली सिंहाची छाती,
शत्रूच्या डावापुढे हरली कपटाची नीती।
आरमार उभे करून जिंकला सागराचा मान,
दूरदृष्टी, धैर्य, बुद्धी यांचा दिला नवा प्रमाण।
स्त्रीचा सन्मान, धर्माचा आदर, न्यायाचा ध्यास,
म्हणूनच आजही जनतेच्या हृदयात त्यांचा वास।
शिवराय शिकवितात परिश्रम, प्रामाणिकपणा,
संकटांतही न सोडावा धैर्याचा खंबीर बाणा।
स्वार्थापलीकडे जाऊन करावा राष्ट्राचा विचार,
हाच शिवछत्रपतींच्या जीवनाचा खरा आधार।
तुमच्या चरणी कृतज्ञतेची अर्पितो ही वाणी,
शिवराया, प्रेरणास्रोत माझे — तुमचा भक्त योगी।
हिंदी
शिवनेरी के दुर्ग पर स्वतंत्रता का सूरज उगा,
माँ जीजाबाई के संस्कारों से वीर शिवबा जगा।
रामायण की कथाएँ, महाभारत का तेज,
बाल शिवाजी के मन में जला स्वराज्य का सेज।
दादोजी की शिक्षा से कर्म का मार्ग मिला,
अन्याय के विरुद्ध खड़े रहने का संकल्प खिला।
मावलों के संग मिलकर विश्वास का जाल बुना,
प्रजा के सुख के लिए जीवन का हर क्षण चुना।
तोरणा को जीतकर स्वाभिमान का ध्वज लहराया,
सह्याद्रि की घाटियों में स्वराज्य का गीत गाया।
अफज़ल ख़ान के सम्मुख सिंह-सा साहस दिखाया,
शत्रु के हर छल को बुद्धि और शौर्य से हराया।
नौसेना का निर्माण कर सागर का मान बढ़ाया,
दूरदृष्टि और नेतृत्व का नया आदर्श दिखाया।
नारी सम्मान, धर्म आदर और न्याय का था ध्येय,
जन-जन के हृदय में आज भी उनका वास अजेय।
शिवराय हमें सिखाते हैं परिश्रम और ईमान,
विपत्ति में भी न छोड़ो साहस और स्वाभिमान।
स्वार्थ से ऊपर उठकर राष्ट्र का करो विचार,
यही है छत्रपति शिवाजी के जीवन का सच्चा सार।
आपके चरणों में अर्पित है श्रद्धा की यह वाणी,
शिवराय, मेरे प्रेरणास्रोत हैं आप — आपका भक्त योगी।
English
On Shivneri Fort, a bright sun rose.
Jijabai shaped his mind to show a noble pose.
Ramayana and Mahabharata played their part.
Lighting a thought of liberty in Young Shivaji’s heart
Dadoji guided his growing years.
He learned discipline and conquered fears.
With his Mavalas, he built trust.
For his people, he was fair and just.
He captured Torna and raised his name.
Across the Sahyadris spread his fame.
Before Afzal Khan, he stood so brave.
With wisdom and courage, victory he gave.
He built a navy strong and grand.
He secured the seas and protected the land.
He honored women and upheld what was right.
He ruled with justice and moral light.
He taught us honesty, effort, and pride.
He showed us how to stand by truth's side.
To serve the nation was his way.
His message still guides us today.
At your feet, I offer my gratitude, O King.
Shivray, your devotee Yogi shall forever sing.
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